संपत्ति पर उत्तराधिकार कर: परिचय, नियम और कर निर्धारण
संपत्ति पर उत्तराधिकार कर: परिचय, नियम और कर निर्धारण
उत्तराधिकार कर मृतक व्यक्ति की संपत्ति पर लगाया जाने वाला कर है, जो वसीयत में नामित लाभार्थियों या उत्तराधिकार कानूनों द्वारा निर्धारित लाभार्थियों को विरासत में मिलती है। भारत में वर्तमान में उत्तराधिकार पर कोई कर नहीं लगता है। हालांकि, उत्तराधिकारियों को अन्य कर नियमों को समझना आवश्यक है।
विरासत कर क्या है?
परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद विरासत में मिली संपत्ति पर उत्तराधिकार कर लगाया जाता है। यह कर आमतौर पर संपत्ति प्राप्त करने वाले उत्तराधिकारी द्वारा अदा किया जाता है। ब्रिटेन और अमेरिका सहित कई देशों में यह कर लागू है। हालांकि, भारत में उत्तराधिकार पर कर लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है। उत्तराधिकार कर (एस्टेट टैक्स) को 1985 से समाप्त कर दिया गया था।
वंशानुक्रम के प्रकार
भारत में उत्तराधिकार कई तरीकों से प्राप्त होता है। उत्तराधिकार का तरीका कराधान और स्वामित्व अधिकारों को प्रभावित करता है। हालांकि संपत्ति पर कोई उत्तराधिकार कर नहीं है, लेकिन संपत्ति के हस्तांतरण का तरीका कर देयता को प्रभावित कर सकता है।
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उत्तराधिकार की वसीयत
वसीयत एक कानूनी दस्तावेज है जिसमें संपत्ति के बंटवारे का विवरण होता है। वसीयत बनाने वाले व्यक्ति को वसीयतकर्ता कहा जाता है। वसीयतकर्ता की मृत्यु के बाद, उसके कानूनी वारिसों को संपत्ति प्राप्त होती है।
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नामांकन द्वारा उत्तराधिकार
नामांकन से बैंक खातों, सावधि जमा, बीमा पॉलिसियों और शेयरों के लिए संपत्ति हस्तांतरण सरल हो जाता है। नामांकित व्यक्ति का चयन संपत्ति के स्वामी द्वारा किया जाता है, और स्वामी की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति को संपत्ति प्राप्त होती है।
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संयुक्त स्वामित्व द्वारा उत्तराधिकार
संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्तियां एक स्वामी की मृत्यु के बाद स्वतः ही जीवित स्वामी को हस्तांतरित हो जाती हैं। इससे कानूनी विलंब से बचा जा सकता है, लेकिन कर लागू होता है। संयुक्त संपत्ति पर कोई उत्तराधिकार कर नहीं लगता है। हालांकि, संपत्ति बेचने पर जीवित स्वामी करों के लिए उत्तरदायी हो जाता है।
विरासत में मिली संपत्ति की बिक्री पर कर
विरासत में मिली संपत्ति के स्वामी को उस संपत्ति की बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर का भुगतान करना होता है। विरासत में मिली कोई भी संपत्ति उपहार कर से मुक्त होती है, लेकिन बाद में उस संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि कर मुक्त नहीं होती और पूंजीगत लाभ कर के अंतर्गत कर योग्य होती है।
पूंजीगत लाभ दीर्घकालिक या अल्पकालिक हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति कितने समय तक स्वामित्व में रही। विरासत में मिली संपत्ति की बिक्री पर पूंजीगत लाभ की गणना के लिए, स्वामित्व अवधि उस समय से शुरू होती है जब पिछले मालिक ने वह संपत्ति खरीदी या प्राप्त की थी।
कर और विरासत पर अंतिम विचार
विरासत से आर्थिक सुरक्षा मिल सकती है। लेकिन वारिसों को कर नियमों को समझना आवश्यक है। भारत में संपत्ति पर कोई विरासत कर नहीं है, लेकिन विरासत में मिली संपत्ति की बिक्री पर पूंजीगत लाभ कर लगता है। कर रिटर्न में इसकी सही जानकारी देना बेहद ज़रूरी है।
अस्वीकरण:
इस लेख में दी गई जानकारी आयकर अधिनियम, 2025 और उसके अंतर्गत जारी आयकर नियम, 2026 के मौजूदा प्रावधानों, कानूनों और विनियमों के अनुसार है। कर कानूनों में समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं। यहां उल्लिखित लाभ/मार्गदर्शन को कंपनी की राय/दृष्टिकोण नहीं माना जाना चाहिए। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि उक्त लेख के अंतर्गत लागू कर लाभों/मार्गदर्शन के संबंध में अपने व्यक्तिगत कर सलाहकार से स्वतंत्र राय लें।