What is Section 22 Of Income Tax Act?
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आयकर अधिनियम की धारा 22 क्या है?

आयकर अधिनियम की धारा 22 क्या है?

आयकर अधिनियम की धारा 22 क्या है?

आयकर अधिनियम की धारा 22 भारत में गृह ऋण लेने वाले व्यक्तियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह धारा संपत्ति खरीदने या निर्माण के लिए लिए गए ऋण पर दिए गए ब्याज पर कटौती की अनुमति देती है, जिससे कर का बोझ कम होकर घर का मालिक बनना आसान हो जाता है। आवास की बढ़ती कीमतों के बीच, ये कर लाभ कई करदाताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। चूंकि गृह ऋण घर खरीदारों के लिए सबसे आम वित्तपोषण विकल्पों में से एक है, इसलिए धारा 22 की पूरी क्षमता को समझना सालाना हजारों रुपये बचाने में मददगार साबित हो सकता है।

आयकर अधिनियम की धारा 22 उन व्यक्तियों को कर राहत प्रदान करती है जिन्होंने संपत्ति खरीदने, निर्माण करने, मरम्मत करने, नवीनीकरण करने या पुनर्निर्माण करने के लिए ऋण लिया है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह लाभ मकान संपत्ति से अर्जित आय पर लागू होता है, चाहे वह स्वयं के रहने के लिए हो या किराए पर दी गई हो। गृह ऋण पर भुगतान किए गए ब्याज को धारा 22 के तहत कटौती के रूप में दावा किया जा सकता है, जिससे आपकी कर योग्य आय में काफी कमी आती है।

दो प्रमुख श्रेणियां हैं जिनके तहत कटौतियां अनुमत हैं—एक स्वयं के कब्जे वाली संपत्तियों के लिए और दूसरी किराए पर दी गई संपत्तियों के लिए। स्वयं के कब्जे वाली संपत्तियों के लिए, धारा 22 के तहत अधिकतम कटौती ₹2 लाख तक सीमित है। दूसरी ओर, यदि मकान किराए पर दिया गया है, तो भुगतान किए गए ब्याज की पूरी राशि कटौती के रूप में दावा की जा सकती है। हालांकि, एक ही वित्तीय वर्ष में आय के अन्य मदों (जैसे वेतन) के विरुद्ध समायोजित की जा सकने वाली मकान संपत्ति से हुई कुल हानि ₹2 लाख तक सीमित है; शेष हानि को अगले 8 वर्षों तक आगे ले जाया जा सकता है और भविष्य की मकान संपत्ति आय के विरुद्ध समायोजित किया जा सकता है।

कृपया ध्यान दें, नई (डिफ़ॉल्ट) कर व्यवस्था के तहत, स्वयं के कब्जे वाली संपत्तियों के लिए लिए गए ऋणों पर ब्याज की कटौती उपलब्ध नहीं है। हालांकि, किराए पर दी गई संपत्तियों के लिए लिए गए ऋणों पर पूर्ण ब्याज राशि की कटौती नई व्यवस्था के तहत अभी भी अनुमत है। करदाता अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर पुरानी और नई कर व्यवस्थाओं में से किसी एक को चुनकर अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

आयकर अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत अपवाद

आयकर अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत अपवाद

आयकर अधिनियम की धारा 22 पर्याप्त राहत प्रदान करती है, लेकिन इसकी कुछ शर्तें हैं। पहली शर्त यह है कि स्वयं के कब्जे वाली संपत्ति पर वार्षिक कटौती की सीमा 2 लाख रुपये है। इसका अर्थ यह है कि भले ही भुगतान किया गया ब्याज इस सीमा से अधिक हो, आप स्वयं के कब्जे वाले घरों के लिए 2 लाख रुपये से अधिक की कटौती का दावा नहीं कर सकते। हालांकि, किराए पर दी गई संपत्तियों पर ब्याज कटौती की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, जिससे यह किराए पर संपत्ति रखने वालों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन जाता है।

दूसरा, निर्माण या अधिग्रहण पूरा होने से संबंधित एक शर्त है। ऋण का उपयोग संपत्ति खरीदने या निर्माण करने के लिए किया जाना चाहिए, और निर्माण उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पांच वर्षों के भीतर पूरा हो जाना चाहिए जिसमें ऋण लिया गया था। यदि निर्माण इस समय सीमा के भीतर पूरा नहीं होता है, तो स्व-अधिग्रहित संपत्तियों के लिए धारा 22 के तहत कटौती ₹2 लाख के बजाय ₹30,000 तक कम हो जाती है।

इसके अतिरिक्त, निर्माण-पूर्व अवधि के लिए कटौती उपलब्ध है, लेकिन संपत्ति का निर्माण पूरा होने के बाद केवल पांच समान किस्तों में ही।

संपत्ति के लिए गृह ऋण पर ब्याज की कटौती

संपत्ति के लिए गृह ऋण पर ब्याज की कटौती

आयकर अधिनियम की धारा 22 के तहत सबसे लोकप्रिय लाभ गृह ऋण पर दिए गए ब्याज पर छूट है। यह उन व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है जिन्होंने घर खरीदने या निर्माण के लिए ऋण लिया है। जैसा कि पहले बताया गया है, स्वयं के कब्जे वाली संपत्तियों पर अधिकतम वार्षिक छूट ₹2 लाख है, बशर्ते निर्माण या अधिग्रहण पांच वर्षों के भीतर पूरा हो जाए। किराए पर दी गई संपत्तियों के लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं है।

अस्वीकरण:

अस्वीकरण:

इस लेख में दी गई जानकारी आयकर अधिनियम, 2025 और उसके अंतर्गत जारी आयकर नियम, 2026 के मौजूदा प्रावधानों, कानूनों और विनियमों के अनुसार है। कर कानूनों में समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं। यहां उल्लिखित लाभ/मार्गदर्शन को कंपनी की राय/दृष्टिकोण नहीं माना जाना चाहिए। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि उक्त लेख के अंतर्गत लागू कर लाभों/मार्गदर्शन के संबंध में अपने व्यक्तिगत कर सलाहकार से स्वतंत्र राय लें।

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